आज भारत में और हर जगह दिन प्रतिदिन प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा हे. कुदरत ने जो हमें यह खुबसूरत हवा , पानी , प्रकाश , धरती , आकाश आदि कीमती भेट जो दी हे. पता नहीं हम यह भेट हमारी अगली पीढ़ी ओ को अच्छे से दे भी पाएँगे या नहीं. हमें इन सभी प्राकृतिक सौन्दर्य को अच्छे से और प्रदूषण रहित रखने के लिए लोगो में जागरूकता लानी चाहिए.

प्रदूषण कई प्रकार के होते हे. जल प्रदूषण , वायु प्रदूषण , भूमि प्रदूषण , ध्वनी प्रदूषण , इत्यादि .

एक तरह से देखा जाये तो प्रदूषण होने के कारण तो बहोत हे ही किन्तु उसकी बुरी असर भी अधिक ही हे जो नुकसान ही नुकसान कारक हे. 

प्रदूषण होने के कारण :- 

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  • नदी , बांध , तालाब , कुए , समूद्र इत्यादि में हम अनेक प्रकार के कचरे डालते हे. जो जल प्रदूषण का एक कारण हे.
  • कई एसे कंपनी या भी हे जिसका दूषित रासायनिक पानी या कचरा गटर द्वारा या किसी और तरीके से नदी या तालाब में जाता हे जो जल प्रदूषण का मुख्य कारण हे .
  • हम ने दिन प्रतिदिन प्रगति तो कर ली हे किन्तु दिन-प्रतिदिन मोटरवाहन , विमान , इत्यादि की संख्या भी बढ़ रही हे जो वायु प्रदूषण का मुख्य कारण हे.
  • साथ ही अनेक रासायनिक कंपनी ओ द्वारा व्यर्थ पदार्थ चिमनी ओ द्वारा धुए के रूप में  बहार हवा में निकाला जाता हे.  जो वायु प्रदूषण होनेका कारण हे .
  •  जमीन पर हम यहाँ वहां अनेक प्रकार के कचरे डालते हे. और जमीन प्रदूषण का मुख्य कोई कारण हो तो वह प्लास्टिक ही हे. प्लास्टिक के छोटे तुकडे भी पिगालने के लिए सालो लग जाते हे.

प्रदूषण की प्रयावरण पर असर :- 

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  • प्रदूषण की पर्यावरण पर सबसे बुरी असर मानव के स्वास्थ्य पर ही होती हे.
  • मानव के साथ साथ अन्य पशु , पक्षी , वन्य जिव , समुद्री जिव , पालतू जिव इत्यादि के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव ही पड़ता हे .
  • प्रदूषण के कारण पृथ्वी का ओज़ोन स्तर धीरे धीरे कम हो रहा हे. यह ओज़ोन स्तर सूर्यप्रकाश के ऐसे किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकता हे जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हे . और परिणाम स्वरुप लोगो में त्वचा के भी अनेक रोग देखे जाते हे .
  • जल प्रदूषण के कारण पानी भी ख़राब हो जाता हे जिसकी सीधी असर स्वास्थ्य पर ही होती हे .
  •   जल प्रदूषण के कारण नदीयां भी विलुप्त होने की कगार पर हे. हमारी सरस्वती नदी जिसका वेदों में और कई ग्रंथो में वर्णन हे किन्तु यह नदी आज कहाँ हे …?????

प्रदूषण नियंत्रण के लिए हमारा सहयोग और उपाय :- 

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आप यह सोच रहे हे की प्रदूषण बढ़ रहा हे किन्तु हम क्या कर सकते हे. किन्तु आप प्रदूषण निवारण के लिए अनेक तरीके से अपना योगदान दे सकते हे .

  • आप के पास यदि कोई मोटर वाहन या स्कूटर वगेरा नहीं हे तो आप प्रदूषण निवारण के लिए बहोत बड़ा योगदान दे रहे हे.
  • यदि आप के पास मोटर वाहन या अन्य वाहन हे तो आप को जितनी जरुरत हे उतने ही वाहन ख़रीदे. आज कल लोगो के पास दिखावे के लिए 3 – 4 ख़ुद की गाड़िया होती हे किन्तु वे यह नहीं समजते की इसी वाहनों की वजह से हम परिसर की हवाए दूषित कर रहे हे.
  • नदी , तालाब , समुद्र इत्यादि जगह जभी घूमने जाए तो उसमे कचरा वगेरा बिलकुल न डालिए और दुसरो को भी कचरा न डालने के लिए प्यार से समजाये.
  • अपने और आसपास के परिसर में वृक्ष , पेड़ उगाए इसकी सीधी असर नदियाँ पर होती हे. आज कल जो नदियाँ विलुप्त हो रही हे उसका भी यही कारण हे की पेड़ पौधे काट दिए जाते हे.
  • हो सके उतना कम कचरा करे. और गिला और सुका कचरा छाटकर दीजिये. ताकि सुके कचरे जैसे की प्लास्टिक वगेरा Recycle किया जा सके और गिले कचरे से खाद तैयार किया जा सके .
  • जो ऑफिस लेवल के छोटे बड़े कर्मचारी हे वह हो सके तो पेपर का कम उपयोग करे. ईमेल आदि नयी टेक्नोलॉजी का इस्तमाल करे. पेपर के दोनों साइड का इस्तमाल करके हम पेपर का भी कम उपयोग करके एक योगदान दे सकते हे .
  • हमारी बिल्डिंग , ऑफिस आदि के आसपास के परिसर में  हो सके उतना हमारे द्वारा कचरा ना हो उसका खास ध्यान रखे .
  • यदि आप का कोई व्यवसाय हो और ख़ुद की फेक्टरी या उद्योग हो तो सरकार द्वारा दिए गए पर्यावरणीय नियंत्रण के सभी नियमो का पालन करे.
  • शादी , छोटे-मोटे फंक्शन , दिवाली इत्यादि पर हम फटाके फोड़ते हे. इसके लिए हम किसीको ना तो नहीं कह सकते किन्तु यदि आप फटाके नहीं जलाते हे तो आप पर्यावरण के लिए एक बड़ा और उत्तम योगदान दे रहे हो.
  • घर पर बनाया गया खाना, पानी इत्यादि छोटी बात ही हे किन्तु महत्व की बात हे. बचा हुआ खाना फेकने की बजाय जरुरतमंद को देना और पानी का भी जरुरत हो उतना ही इस्तमाल करना या बिगाड़ कम करना अपने आप में एक बड़ा योगदान हे .

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