रोजिंदा जीवन में हम छोटे – छोटे अनेक पदार्थ जैसे की , जीरा , हिंग पावडर , राइ आदि व्यंजनों का हम भोजन स्वादिष्ट बनाने के लिए इस्तमाल करते हे. किन्तु इन छोटे-छोटे पदार्थो का भी हमारे स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव होता हे. आज हम भारतीय द्वारा बनाये जाने वाले व्यंजन जैसे की दाल – रसम – कढ़ी इत्यादि में उपयोग किये जाने वाले  कढ़ी-पत्ते( Curry Leaves ) के फ़ायदे के बारे में जानते हे. कढ़ी पत्ते को हम मीठी नीम भी कहते हे.

कढ़ी-पत्ते ( Curry Leaves ) के फ़ायदे :- 

  • कढ़ी-पत्ते शरीर का कोलेस्ट्रोल कम करने के लिए अति फायदेमंद हे .
  • कढ़ी – पत्ता ( नीम ) एक कीटाणुनाषक तत्व भी हे इससे कई प्रकार के कीटाणु हमारे शरीर से दूर रहते हे .
  • कढ़ी-पत्ते से आँखों की रोशनी तेज होती हे.
  • इससे शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति भी बढती हे .
  • मधुमेह ( Diabetes )  के दर्दी ओ के लिए भी कढ़ी पत्ता अधिक लाभदायी हे
  • वजन कम करने के लिए , बालों के लिए , बाल सफ़ेद होने से बचाने के लिए , चहेरे के लिए , दांत मजबूत बनांने के लिए इत्यादि में  भी कढ़ी-पत्ता अत्यंत लाभदायी हे.
  • यदि किसी प्रकार का इन्फेक्शन हो तो तभी भी कढ़ी-पत्ता खाना लाभदायी होता हे.
  • खुजली तथा अनेक प्रकार के चर्म रोग में भी कढ़ी -पत्ता ( नीम ) का इस्तमाल किया जाता हे .
  • इसका उपयोग अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक दवाइए बनाने में भी होता हे.

त्योहारों में विशेष महत्व :- 

मीठे नीम यानि कढ़ी-पत्ते का भारत के त्याहोर जैसे की महाराष्ट्र में गुढीपाडवा और दक्षिण भारत के अनेक राज्य में उगादी पचडी जैसे अनेक त्योहारों में मीठे नीम का अधिक महत्व हे. गुढीपाडवा त्यौहार महाराष्ट्र में नए साल की तरह मनाया जाता हे. यह त्यौहार चैत्र माह के शुरू होने पर मनाया जाता हे. इसी दौरान मौसम बदलने की वजह से वातावरण में अनेक प्रकार के बदलाव होते हे जिससे कीटाणु भी बढ़ते हे और अनेक प्रकार के रोग हो ने की संभावना भी होती हे इसीलिए इस त्यौहार के दौरान मीठे नीम का जूस पिने का भी रिवाज हे .