भारत में अनेक प्राचीन गुफ़ाए , किल्ले , पैलेस , मंदिर आए हुए है. किन्तु इनमे से कुछ  किल्ले और गुफ़ाए अति प्राचीन है. भारत की अजंता और इलोरा की गुफ़ा विश्व प्रसिद्ध है. साथ ही इन गुफ़ाओ को “World Heritage Site ” में भी शामिल किया गया है. भारत की इन कलात्मक गुफ़ाओ का आकर्षण कुछ अलग ही है.

मौर्यवंश के दौरान बौध साधूओ को रहने के लिए और अभ्यास करने के लिए अनेक गुफ़ाए बनायीं गयी थी. बिहार की बराबर की गुफ़ाए भी इनमे शामिल है. यह गुफ़ा अजंता और इलोरा की गुफ़ा की तरह बड़ी तो नहीं  है , किन्तु यह भारत की सबसे प्राचीन गुफ़ाओ में से एक है.

  तो आइए भारत की इस प्राचीन गुफ़ा के बारे में कुछ जानकारियां जानते है ( बराबर गुफ़ा )  :- 

  • ये गुफ़ाए भारत के बिहार राज्य में जहानाबाद जिल्ले में गया से लगबग 24 km की दुरी पर स्थित है .
  • माना जाता है की यह गुफ़ाए मौर्यकाल में लगभग 322 इसा पूर्व ( 322 BCE ) से बनायीं गयी है .
  •  बराबर की पहाड़ी पर कुल 7 गुफ़ाओ का समूह हे जिनमे से 3 गुफ़ाए बराबर की पहाड़ी और 4 गुफ़ाए नागार्जुन की पहाड़ी में स्थित है.
  • एक ही चट्टान को काटकर बनायीं गयी ये गुफ़ाए बिहार के आकर्षण का केंद्र है .

  • भारत की यह सबसे प्राचीन गुफ़ा सम्राट अशोक तथा उनके पोते दशरथ के काल में बनायीं गयी है.
  • इन गुफ़ाओ में जैन तथा बुद्ध धर्म की प्रतिमा तथा कलात्मक शैली नजर आती है .
  • कहाजाता है की बौध संप्रदाय तथा अन्य संप्रदाय के साधू वर्षारुतु के दौरान इन्ही गुफ़ा ओ में आश्रय लेते थे .
  • बराबर की इन 3 गुफ़ाओ को लोमांसरुषी , सुदामा और कर्णचौपर के नाम से जाना जाता हे .

  • सबसे पहली लोमांस रुषी की गुफ़ा में हाथी के शिल्प के साथ कमान आकर का प्रवेशद्वार हे.
  • दूसरी सुदामा गुफ़ा में प्रवेश करते ही एक गोलाकार खंड आता हे .
  • यह तीनो गुफ़ाए एक ही चट्टान से काटकर और परफेक्ट माप लेकर बनायीं गयी हे जिनकी शिल्पकला तथा वास्तुकला अदभुत है .
  • कहाजाता है की सुदामा की गुफ़ा लगभग 261 ईसापूर्व बनायीं गयी थी जो सम्राट अशोक द्वारा समर्पित की गयी थी और कर्ण चौपर गुफ़ा में मिले हुए शिलालेख तक़रीबन 245 ईसापूर्व होने के माने जाते है .